भारतीय विमान यात्रियों को देश की वायु सीमा में उड़ान भरने दौरान फोन कॉल और इंटरनेट ब्राउजिंग की सुविधा मिल सकती है। सरकार के घरेलु और इंटरनेशनल एयरलाइन्स को दोनों सर्विस उपलब्ध कराने की मंजूरी दे दी है। हालाँकि , ये सुविधा 3000 मीटर की उचाई पर पहुंचने पर ही दी जा सकेगी।
अब हम सब की जहन में एक सवाल आता है की इतनी उचाई में इंटरनेट मिलेगा कैसे, तो इतनी उचाई पर इंटरनेट मुहैया कराने के दो जरिये हो सकते हैं.
1. जमीन पे बने टावर के सम्पर्क से :
जमीन पर मौजूद मोबाइल ब्रॉडबैंड टावर की मदद से जो विमान के एंटीना तक सिग्नल पहुँचती है। जैसे ही विमान अलग अलग इलाकों से गुजरता है, वह ही आसपास वाले टावर से मिलने वाले सिग्नल से कनेक्ट कर लेता है। लेकिन जब विमान झीलों या सागर के या किसी दुर्गम इलाके के ऊपर से गुजरता है, तो कनेक्टिविटी की दिक्कत आ सकती है।
2. Satellite Technology:
यह तकनीक हमारे घर में लगे Dish Tv Antena की तरह काम करता है जो सॅटॅलाइट से सिग्नल प्राप्त करता है और हमारे घर तक पहुँचता है, ठीक उसी तरह इस तकनीक के तहत विमान को जिओस्टेशनरी ऑर्बिट मौजूद satelite से कनेक्ट करना होता है, जो reciever और ट्रांसमीटर को सिग्नल भेजता है।



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