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क्यों कड़ी धुप से आने के बाद या कठिन परिश्रम करके आने के बाद तुरन्त लेटकर आराम नहीं करना चाहिए ?



प्राचीन मनीषियों ( विद्वानों ) ने कहा  है कि कहीं से भी आने के बाद पहले मुँह धोना  चाहिए , उसके बाद हाँथ और अन्त में पैर का प्रलाक्षण (धोना ) करना चाहिए चाहिए , तुरन्त आराम की स्थिति में आने पर गर्मी सिर में चढ़ जाने का डर होता है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण :-

वैज्ञानिक दृष्टि से भी तुरंत आराम नहीं करना चाहिए क्योंकि कड़ी धुप से आने के बाद या कठिन परिश्रम के उपरांत तुरंत बिस्तर पर पड़कर आराम करने से बीमार हो जाने के ज्यादा चांस होते हैं, क्योंकि शरीर तो तुरंत आराम की स्थिति में पहुंच जाता है किन्तु मांस पेशियाँ, रक्त संचार, हृदय की गति आदि में तुरंत सामान्य स्थिति में नहीं आ पाती जिस कारन शरीर और हृदय की गति आदि में  तुरंत ताल मेल नहीं बनता अथार्त विरोधाभास होता है तथा अक्सर लोग बीमार पड़ जाते हैं। ऋषि -मुनियों ने पहले मुँह धोना, फिर हाँथ और उसके बाद पैर धोने का जो विधान बनाया गया है वह विज्ञानं की नजर में पूर्ण रूप से उचित है, क्योंकि मुँह के साथ मस्तक (सिर का अगला भाग ) नाक, कान, और समूचा चेहरा धूल जाता है जिससे सिर ठंडा हो है अथार्त सिर की गर्मी नीचे की और उतरती है फिर हाँथ धोने पर और नीचे उतरती है इस तरह अन्त में पैर के तालुओं से होकर अर्थ (पृथ्वी में ) हो जाती है और शरीर सुरक्षित रहता है।     

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