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आखिर क्यों हिन्दुओं में विवाह मण्डप में हरे बांसों के पांच स्तम्भ लगाए जाते हैं ?



मण्डप बनाते समय एक - एक बांस प्रत्येक कोने पर तथा पांचवा बांस केंद्र (मध्य ) में लगाया जाता है। प्रत्येक बांस की जड़ में एक - एक देवता का स्थान मानकर ऐसा करते हैं। चारों दिशाओं में वर - बधु की रक्षा के लिए देवताओं का पूजन किया जाता है। पंच देवताओं का अह्वान पूजन करके मध्य बांस के नीचे जमीन में स्थापित करते हैं। जिसका आशय यह होता है कि वर - वधू पृथ्वी के चारों कोनों में कहीं रहे अथवा मध्य भाग में रहें , ये पाँचों देवता उनकी सुरक्षा करें। पाँचों बांसों के ऊपर सरपत (कुश की जाती की एक घास ) का छप्पर डाला जाता है जो नानकनडक्टर होता है जिसका अर्थ आकाशीय प्रकोप से वर - वधू की रक्षा से होता है। पंच देवता में पांचों वास्तु देवता का स्थान किया जाता है जो  वर - वधू के दाम्पत्य जीवन को सुखमय बनाये रखते हैं। पांच बांस यह स्पष्ट करते हैं कि वर - वधू पृत्वी के चारों कोनों में कहीं भी रहे या पृत्वी के मध्य में रहे , हरे बांस की भांति सदा हरे - भरे और सुखी रहें। 

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